क्या आपका

दिल टूटा है?

कहानियों का एक ऐसा संकलन, जिसमें दिल के टूट जाने की खामोश खनक है और अथाह समुद्र के भीतर होता हुआ भावनाओं का मंथन।

हर दिल का रिश्ता प्रेम का रिश्ता होता है ।
जब रिश्ता टूटता है तो एक तोड़ने वाला होता है और एक है जो टूटता है । जो तोड़ता है वो सब
भूल कर आगे अपने सपनों के संसार में चला जाता है और जो टूटा है वो टूटे दिल के टुकड़ों को समेटता
सम्हालता रह जाता है।
जरूरी नहीं की वो रिश्ता दो प्रेमियों का हो । वो कोई भी रिश्ता हो सकता है । माँ-बेटे का, भाई-बहिन
का या दोस्तों का ।
पर मेरी कहानियों के संग्रह में है मूल रूप से एक प्रेमीका की बेवफाई।

कोई पूछे मुझसे उर्वशी की बेवफाई का दर्द तो मैं कैसे बताऊँ ?
दो शब्दों में कह दूँ की “आंसू” निकल रहे हैं ।
लो कहानी ख़तम ।
लेकिन जब दर्द की दास्तान सुननी हो तो जब शुरू होगी तो उसका अंत भी होगा । बिना अंत बताये
मैं कहानी को “कैसे” रोक दूँ ? दर्द मुझसे अपना हिसाब मांग रहा है और मैं उसे हिसाब ही दे रहा हूँ
जब हिसाब पूरा हो जाएगा मैं लिखना बंद कर दूंगा ।
तब तक दर्द है तो दर्द ही पढ़िए ।

मोहब्बत एक पागलपन है,

बीमारी है जिसमें भावनाओं का शोर बुद्धि को कुंद कर देता है।

“क्या आपका दिल टूटा है” ऐसी ही कहानी है ।

आप मोहब्बत की लाश उठाये भटकते रहते हैं इस उम्मीद से की शायद मुहब्बत में फिर जान आ जाये । वो फिर वापस आ जाये । उसने की थी आपसे बेवफाई और आप मोहब्बत की लाश के पास बैठे उससे शिकायतें करते रहते हैं । उसे अपनी कहानियां सुनाते हैं, और रोते हैं । उसे अपने दिल का हाल बताते हैं और आंसू बहाते हैं । मन में भरे हुए आक्रोश को शब्द देते हैं, उलाहने देते हैं और दिखाते हैं उसे शीशा की कितनी बेईमान है वो । प्यार में इंतज़ार रहता है उसके लौट आने का, उम्मीद होती है की मोहब्बत में जान आ जाएगी और उसकी लाश उठेगी और आपको गले लगा लेगी ।
दुःख से पागल आप समझ ही न पाते कि लाश न सुनती है और न ही देखती है ।
उसके पास दिल ही नहीं ।

भावनाओं के धनी हैं तो आपकी मेरी मूल कहानी की ये पंक्तियाँ जकड लेंगी।

“पापा खामोश हो गए । उन्होंने कुछ न कहा पर फिर भी ख़ामोशी, ख़ामोशी से नाराज़ हो गयी । ख़ामोशी ने ख़ामोशी से पापा के दिल की दास्ताँ को बयां कर दिया । शहर मे ढिंढ़ोरा पिट गया की “इनकी बीवी भाग गयी” । शब्दों की तरंगे सीसा बन कर दिल की गहराइयों में उतर गयीं ।”

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